सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 नवंबर) को केरल के गवर्नर की आलोचना की कि उन्होंने जस्टिस (रिटायर्ड) सुधांशु धूलिया की रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी की, जो राज्य में एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ़ डिजिटल साइंसेज इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के कुलपति की नियुक्ति के बारे में थी। न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि गवर्नर से जस्टिस धूलिया कमेटी की सिफारिशों पर जल्द ही फैसला लेने की उम्मीद है।
बता दें, कोर्ट ने अगस्त में राज्य सरकार और चांसलर (गवर्नर) के बीच गतिरोध को देखते हुए कुलपति नियुक्ति के लिए नामों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए जस्टिस धूलिया की अध्यक्षता में एक सर्च कमेटी बनाई। कोर्ट ने चांसलर को मुख्यमंत्री द्वारा सुझाए गए वरीयता क्रम में ही नियुक्ति करने का भी निर्देश दिया।
कोर्ट का यह आदेश गवर्नर की एक विशेष अनुमति याचिका पर आया था। यह याचिका टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के चांसलर के तौर पर दायर की गई। इसमें केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें राज्य सरकार की सिफारिश के बिना विषविवद्यले के अस्थायी कुलपति चांसलर द्वारा नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।
केरल सरकार ने जस्टिस पारदीवाला की बेंच के सामने यह मामला उठाया। राज्य की ओर से वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने बेंच को बताया कि हालांकि जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट सौंप दी गई, लेकिन चांसलर ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया। इसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, “क्या चांसलर ने माननीय जस्टिस धूलिया की रिपोर्ट देखी है?” गवर्नर के वकील ने जब ‘नहीं’ में जवाब दिया तो जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, “उन्होंने इसे क्यों नहीं देखा?”
वकील ने जवाब दिया कि उन्होंने जस्टिस धूलिया को भी कार्रवाई का रिकॉर्ड मांगने के लिए लिखा था। उन्होंने कहा, “क्या आप कहते हैं कि चांसलर को रिपोर्ट नहीं मिली है?” वकील ने जवाब दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री की रिपोर्ट मिली है, लेकिन पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला है। जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, “वह मिस्टर गुप्ता के किस रिकॉर्ड की बात कर रहे हैं?” गुप्ता ने जवाब दिया कि उनकी जानकारी के अनुसार पूरी सामग्री सौंप दी गई है।
इसके बाद बेंच ने आदेश दिया: “यह मामला आज केरल राज्य की ओर से जयदीप गुप्ता ने उठाया। हमारे 18.08.2025 के आदेश का सम्मान करते हुए इस कोर्ट के पूर्व जज, माननीय जस्टिस सुधांशु धूलिया ने ज़रूरी काम किया और उसी के अनुसार रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट राज्य के मुख्यमंत्री को भेज दी गई। मुख्यमंत्री ने बदले में रिपोर्ट दोनों यूनिवर्सिटी के चांसलर को भेज दी। चांसलर से उम्मीद है कि वे अब जस्टिस धूलिया की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा फाइल की गई रिपोर्ट को देखेंगे।
चांसलर की ओर से पेश वकील का कहना है कि रिपोर्ट तो मिल गई, लेकिन रिकॉर्ड नहीं मिले हैं। हमें समझ नहीं आ रहा कि रिकॉर्ड न मिलना कमेटी द्वारा फाइल की गई रिपोर्ट को देखने के रास्ते में क्यों आ रहा है। ऐसे हालात में अब हम उम्मीद करते हैं कि चांसलर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार फैसला लेंगे। हम सभी को याद दिला दें कि कमेटी सभी पार्टियों की सहमति से बनाई गई।”
जस्टिस पारदीवाला ने चांसलर के वकील से कहा कि वे निर्देश लेने के बाद बताएं कि फैसला कब लिया जा सकता है। वकील ने आगे दलीलें देनी चाहीं तो जस्टिस पारदीवाला ने उन्हें रोक दिया और कहा, “यह कोई साधारण कागज़ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने जज ने इसे देखा है। इसलिए आपको रिपोर्ट देखनी है और सही फैसला लेना है।”
जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि आप फैसला लेंगे। जब फैसला हमारे सामने आएगा तो हम तय करेंगे कि फैसला सही है या गलत।” उन्होंने मामले की सुनवाई अगले शुक्रवार को टाल दी।